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शिक्षा में नाटक

रंगमंच को आम तौर पर मनोरंजन और राजनीतिक/वैचारिक प्रचार का माध्यम माना जाता है । किन्तु शिक्षा में इसकी भूमिका के कारण ही रंगमंच या नाट्य-कला का वास्तविक महत्व है। भारत में नाट्य शास्त्र को पाँचवाँ वेद , अर्थात् ‘सर्वोच्च ज्ञान’ की पुस्तकों में से एक माना जाता है। भरत के नाट्य शास्त्र के अनुसार, नाट्य सभी प्रकार की कलाओं और शिल्प का समूह … Continue reading शिक्षा में नाटक

प्रगतिवादी रंगमंच और वामपंथी नाटकों में स्त्री-चित्रण

सुनिता भारती एक प्रगतिवादी नाटक देखने के बाद दर्शकों को समझ में नहीं आता कि उन्होंने क्या देखा! अंग्रेज साम्राज्यवादियों ने भारतीय विद्वानों की ही एक भारत-विरोधी लॉबी का निर्माण किया था, जिसका काम था हिन्दू समाज को नीचा दिखाना; ताकि यह साबित हो सके कि जहाँ हजार तरह की अपरिष्कृत परम्पराएँ विद्यमान हैं, वह … Continue reading प्रगतिवादी रंगमंच और वामपंथी नाटकों में स्त्री-चित्रण

बादल सरकार का नाटक पगला घोड़ा : कथानक और रंगदृष्टि

The plot, objective and theatricality of Badal Sarkar’s play PAGLA GHODA has been analysed, with full story, in this review by me in present context. In fact, the circumstances and occurrences taken to weave the plot are not so relevant at present, but are necessarily indicators of self-imposed dominance of males over women in our contemporary society; hence, the play is, of course, a good choice for staging commercially, provided a modified stage-script is prepared in compliance with commercial stage-rules.

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